Diet Rules According to Season मौसम के अनुसार आहार सेवन के नियम

Diet Rules According to Season मौसम के अनुसार आहार सेवन के नियम
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दोस्तों आज सात्विक जीवन का साक्षात्कार कराती डायरी के 26 वें भाग से आपका परिचय करवाने जा रही हूँ। पिछले भाग में आप मेरी डायरी के पन्नों में संजोये “सकारात्मक सोच कैसे विकसित करें” से परिचित होने के सफर में शामिल हुए थे। आप सभी के स्नेह और उत्साहवर्धन के लिए मैं ह्रदय से आभारी हूँ। आइये चलें “मौसम के अनुसार आहार सेवन के नियम” से परिचित होने के सफ़र पर ……

दोस्तों भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में शरीर को रोग मुक्त रखने के लिए आहार -विहार के नियम बनाए गए हैं। दरअसल आयुर्वेद में शरीर के रोगी होने का कारण त्रिदोष (कफ, पित्त और वात) में असंतुलन को माना जाता है। इन त्रिदोषों के आधार पर मनुष्य शरीर की प्रकृति का निर्धारण किया गया है। शरीर की प्रकृति यानी कफ, पित्त, वात की प्रधानता के आधार पर आहार के नियम बनाए गए हैं। हमारे शरीर पर  आहार के अतिरिक्त बदलते मौसम का भी प्रभाव पड़ता है। मौसम के बदलाव के साथ ही शरीर में कफ, पित्त एवं वात का संतुलन घटता -बढ़ता रहता है।

अतः शरीर में त्रिदोष के संतुलन को बनाए रखने के लिए मौसम के अनुकूल आहार का सेवन करना आवश्यक है। इससे शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। आइये जाने मौसम के अनुसार आहार कैसा होना चाहिए?

आयुर्वेद में सूरज की गति के आधार पर वर्ष को उत्तरायण और दक्षिणायन दो भागों में बाँटा गया है प्रत्येक भाग में 3-3 मौसम को सम्मिलित किया गया है जो इस प्रकार हैं:

  1. शिशिर ऋतु (जनवरी – मार्च)
  2. बसंत ऋतु (मार्च – मई)
  3. ग्रीष्म ऋतु (मई – जुलाई)
  4. वर्षा ऋतु (जुलाई – सितम्बर)
  5. शरद ऋतु (सितम्बर – नवम्बर)
  6. हेमंत ऋतु (नवम्बर – जनवरी)

Diet Rules according to Season मौसम के अनुसार आहार के नियम 

  • शिशिर ऋतु में आहार

ये मौसम मध्य जनवरी से शुरू होकर मध्य मार्च तक रहता है। इस समय पाचन अग्नि तेज रहने के कारण भूख अधिक लगती है। अतः भारी और देर से पचने वाले भोजन करना चाहिए। जैसे-  मेवा, तिल, मूँगफली चिक्की, गजक, अदरक, लहसून की चटनी, जिमीकंद, दूध, गेहूँ, हरे चने, शहद, उड़द की दाल, गन्ने का रस, घी, मक्खन आदि इस मौसम में गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए।

क्या नहीं खाएं 

इस ऋतु में ठन्डी ,कड़वी एवं बासी खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए व्रत -उपवास करने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त हल्का और रुखा खाना खाने से बचना चाहिए। वर्ना वात यानी गैस ज्यादा बनने की समस्या हो जायेगी।

  • बसंत ऋतु में आहार के नियम 

ये मौसम मध्य मार्च से मध्य मई तक रहता है। इस समय जौ, चावल, गेहूँ, ज्वा, बाजरा. मक्का आदि अनाज से बने आहार का सेवन अधिक करना चाहिए। दालों में मूँग, चने, अरहर, मसूर और सब्जियों में लौकी, मूली, बथुआ, चुलाई, गाजर, परवल, पालक, धनिया एवं अदरक आदि का सेवन लाभकारी होता है।

क्या न खाएं 

नया अनाज, ठन्डे एवं चिकनाई युक्त भोजन, दही, उड़द, सिंघाड़ा, भैंस का दूध, आलू, प्याज, गन्ना, नया गुड़, खट्टे एवं मीठे पेय पदार्थ के सेवन से परहेज करना चाहिए।

  • ग्रीष्म ऋतु में आहार के नियम 

ये मौसम मध्य मई से मध्य जुलाई तक रहता है। इस मौसम में मीठे , ठन्डे और सुपाच्य खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। चावल, जौ, मूँग एवं मसूर की दाल, फलों का जूस, सूप, छांछ, लस्सी, सत्तू आदि। कच्चे आम का पना, प्याज, तरबूज, खीरा, नारियल पानी, जलजीरा, शिकंजी, गन्ना आदि मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

क्या नहीं खाएं 

गर्म तासीर वाले फल , मिर्च –  मसालेदार भोजन, तला हुआ भोजन खाने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त मैदा और बेसन से बने खाद्य पदार्थ देर से पचते हैं। इसलिए इनके सेवन से भी परहेज करना चाहिए।

  • वर्षा ऋतु में आहार के नियम 

ये मौसम मध्य जुलाई से मध्य सितम्बर तक रहता है। इस मौसम में पानी को उबाल कर पीना चाहिए या फिर फ़िल्टर किया हुआ पीना आवश्यक है। इस मौसम में भी हल्का एवं सुपाच्य, ताजा, गर्म एवं पाचक अग्नि को बढाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

पुराने अनाज चावल, जौ, गेहूँ, बाजरा, भुट्टा, खिचड़ी, कद्दू, बैंगन, परवल, करेला, तरोई, अदरक और नीबू, पुदीने की चटनी का सेवन करना चाहिए। दालों में मूँग और अरहर की दाल, घी या तेल से बने नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।

दूध और आम का सेवन भरपूर मात्रा में किया जा सकता है।

दही की लस्सी में सेंधा/काला नमक, अजवाइन डालकर पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है। किन्तु लस्सी घर में जमाई गयी ताजे दही से बनी होंनी चाहिए।

फलों में सेब , केला, जामुन, नाशपाती और पके हुए देशी आम खाना स्वास्थ्य वर्धक होता है।

क्या नहीं खाएं 

इस मौसम में हरी पत्तीदार सब्जियां, अरवी,भिन्डी,आलू , कटहल, करेला,बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। अनाज में मोठ, उड़द, जौ, मटर, मसूर, ज्वार और पानी के साथ सत्तू का सेवन नहीं करना चाहिए।

बेसन से बने तले हुए खाद्य पदार्थ, मसालेदार खाद्य पदार्थ, बासी खाना नहीं खाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त बाज़ार की दही, लस्सी एवं छांछ का सेवन नहीं करना चाहिए। घर जमाई गयी ताजे दही और छांछ होने पर भी रात में सेवन नहीं करना चाहिए।

शराब और माँस, मछली का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • शरद ऋतु में आहार के नियम 

ये मौसम मध्य सितम्बर से मध्य नवम्बर तक रहता है। इस मौसम में तीखे, मीठे एवं घी/तेल से बने हल्के सुपाच्य भोजन का सेवन करना चाहिए। इस दौरान दूध, दही, घी, मक्खन, मलाई अदि का सेवन करना लाभकारी होता है।

सब्जियों एवं फलों में गोभी, मटर, बथुआ, करेला, मूली, सोया, सेम, मेथी, लौकी, पालक, सिंघाड़ा, अंगूर, टमाटर, सूखे मेवे, नारियल, कमलगट्टा आदि का सेवन करना चाहिए।

क्या नहीं खाएं 

दही और नमक, बेसन से बने कढ़ी, खट्टे पेय पदार्थ का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त उड़द, हींग, करेला, सौंफ, बैंगन, लहसून, सरसों और छांछ का सेवन नहीं करना चाहिए।

वनस्पति घी, भुट्टा, ककड़ी, मछली एवं तीखा मसालेदार भोजन नहीं करना चाहिए।

  • हेमंत ऋतु में आहार के नियम 

ये मौसम मध्य नवम्बर से मध्य जनवरी तक रहता है। इस मौसम में खट्टा, नमकीन और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। इस समय गोंद, मेथी और मेवे के लड्डू, गुड़, मूँगफली, तिल का सेवन अवश्य करना चाहिए। इस समय नए चावल और हरे चने को आहार में शामिल करना चाहिए।

इस मौसम में घी, दूध, पाक, हलवा, माँस, मछली, अंडा आदि पौष्टिक भोजन और गुनगुने पानी का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

क्या नहीं खाएं 

ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थ नहीं खाना चाहिए।

 

 

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