Diet Selection According to Body’s Nature शरीर की प्रकृति के अनुसार आहार का चुनाव कैसे करें

Diet Selection According to Body's Nature शरीर की प्रकृति के अनुसार आहार का चुनाव कैसे करें
0 0
Read Time:11 Minute, 26 Second

diet selection, know your body’s natutre, shrir ki prakriti ki pahchan kise karen, ayurvedic diet and lifestyle, diet selection, शरीर की प्रकृति के अनुसार आहार का चुनाव, शरीर की त्रिदोष प्रकृति क्या है , कफ,वात और पित्त प्रकृति के लक्षण, how to choose right diet, food according to tridosha prakriti, kaph prakriti symptoms, symptoms of vaat prakriti, symptoms of pitt prakriti, kaph badhne ke lakshan, kaph pradhan prakriti ke liye ahaar, vaat pradhan prakriti ke liye ahaar, pitt pradhan prakriti ke liye ahaar, Selection of diet according to Tridosha Prakriti

 



 

 

साप्ताहिक डायरी भाग -11

दोस्तों आज सात्विक जीवन का साक्षात्कार कराती डायरी के ग्यारहवें भाग से आपका परिचय करवाने जा रही हूँ। पिछले भाग में आप मेरी डायरी के पन्नों में श्वांस भरते लम्हों में से सेहत के लिए हानिकारक 6 विरुद्ध आहार की जानकारी तय करने के सफर में शामिल हुए थे।आप सभी के स्नेह और उत्साहवर्धन के लिए मैं ह्रदय से आभारी हूँ।

इस अंक में आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष (कफ, वात एवं पित्त) प्रकृति के लक्षणों को पहचानने और उसी आधार पर दैनिक आहार का सेवन करने की जानकारी का सफर साथ मिलकर तय करेंगे। दोस्तों शरीर के स्वास्थ का सीधा सम्बन्ध हमारे खान -पान से होता है। हमारे द्वारा दिनचर्या में सेवन करने के लिए चयन किये गए भोजन का प्रभव शरीर के कफ, वात एवं पित्त के संतुलन पर पड़ता है। शरीर में इन्हीं त्रिदोषों के असंतुलन से रोगों की उत्पत्ति होती है। अतः कफ, वातऔर पित्त दोष उत्पन्न होने से रोकने के लिए इनके लक्ष्ण के अनुसार आहार के सेवन की जानकारी होना आवश्यक है।

 

दोस्तों, भारतीय भोजन में सभी मसालों का प्रयोग शरीर के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर प्रयोग करने का प्रचलन सदियों पुराना है। दरअसल हम भारतियों को विभिन्न जड़ी बूटियों का ज्ञान हमारी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की देन है। आयुर्वेद के अनुसार – पञ्च महाभूत (आकाश, जल ,पृथ्वी, वायु और अग्नि) से हमारे शरीर की रचना हुयी है। यही पंचभूत तत्व शरीर में भौतिक और मानसिक क्रियाओं को भी प्रभावित करते हैं। जैसे – आकाश और वायु से वात दोष (गैस) , अग्नि से पित्त दोष  (भोजन को पचाने में सहायक पाचन रस), जल और वायु से कफ दोष शरीर में होता है। वात, पित्त और कफ के शरीर में संतुलन से शरीर स्वस्थ और इनके असंतुलन से शरीर अस्वस्थ रहता है।

 

शरीर में त्रिदोष का असंतुलन होने का सीधा सम्बन्ध आहार एवं विहार की क्रियाओं को माना जाता है। इस दृष्टि से आयुर्वेद में मानव शरीर की प्रकृति का निर्धारण त्रिदोषों के आधार पर किया गया है। अर्थात रोगों के उपचार के लिए पहले रोगी के शरीर में वात, पित्त और कफ के दोष के लक्षणों की जाँच की जाती है। फिर उसी के आधार पर आहार में खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है। तो आइये जाने अपने शरीर में त्रिदोष के लक्षण के कैसे पहचाने?

शरीर में त्रिदोष प्रकृति के लक्षण  Shrir meinTridosha Prakriti Lakshan

त्रिदोष यानी कफ, वात और पित्त में से शरीर में किस दोष की वृद्धि हुयी है इसको पहचानने के लिए आइये जाने इनके लक्ष्ण की जानकारी।

वात दोष के लक्षण Vaat Dosha ke Lakshan/symptoms

  • पेट में गैस अधिक बनना।
  • शरीर की त्वचा/स्किन का रुखा होने की समस्या।
  • थकान होना।
  • शरीर की मांसपेशियों में जकदन एवं दर्द होना।
  • गहरी नींद न आने की समस्या।

कफ दोष के लक्षण Kaph Dosha ke Lakshan/symptoms

  • सुबह के समय शरीर में आलस्य एवं भारीपन महसूस करना।
  • सुबह के समय में मुँह में कफ का ज्यादा बनना।
  • जुखाम, श्वांस नली में एलर्जी।
  • शरीर के अंगों में सूजन होना।
  • शरीर का भार बढ़ना।
  • आलस्य एवं भारीपन महसूस होना।
  •  सिर के बालों और त्वचा का अधिक तैलीय/ ऑयली होना।
  • मुँह में मीठापन बने रहना।
  • उल्टी या मितली जैसा प्रतीत होना।

पित्त दोष के लक्षण Pitt/bile Dosha ke Lakshan/Symptoms

  • शरीर में जलन महसूस होना।
  • चक्कर एवं भारीपन महसूस होना।
  • स्किन एवं आँखों में पीलापन।
  • पेशाब का रंग पीला होना।
  • पेट में जलन महसूस होना।
  • ठन्डे खाद्य पदार्थों के सेवन की इच्छा होना।
  • मुँह का स्वाद कड़वा होना।
  • स्वभाव का चिड़चिड़ापन होना।

त्रिदोष प्रकृति के अनुसार आहार का चयन Selection of food according to Tridosha Prakriti

शरीर में  कफ, वात या पित्त के लक्षण बढ़े हुए प्रतीत होने पर दोष को नियंत्रित करने वाले आहार का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। आइये जाने प्रकृति के आधार पर खाद्य पदार्थों का चयन करने की जानकारी।

वात प्रकृति के लिए आहार Diet for vata Prakriti

शरीर में वात का प्रकोप बढ़ने पर वात को कम करने वाले आहार का सेवन करना चाहिए। जैसे –

  • दालों में मूँग की दाल का सेवन करना चाहिए। अरहर/तुहर, उड़द की दाल के सेवन से बचना चाहिए।
  • सब्जियों में करेला, बैंगन, भिन्डी, तरोई, परवल नहीं खाना चाहिए। मूली, शकरकंद,प्याज, पालक, आँवला, नींबू खाया जा सकता है।
  • फलों में केला,अंगूर, खजूर, सेब, अनार, अनानास, स्ट्राबेरी, पपीता , गन्ना, नारियल पानी, आम का सेवन किया जा सकता है।
  • अनाज में जौ,मकई, बाजरा से बना भोजन नहीं करना चाहिए।
  • मक्खन, दूध, घी, ताजा पनीर,शहद,चीनी से बने खाद्य पदार्थ का सेवन किया जा सकता है।
  • तिल का तेल, सरसों का तेल, धनिया, लहसुन, हींग, लौंग, इलायची, दालचीनी, काली मिर्च, जीरा जैसे तेल मसलों में बना भोजन किया जा सकता है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि वात के बढ़े हुए प्रकोप को कम करने के लिए भोजन गर्म और ताजा होना चाहिए। आहार में  चिकनाई युक्त, दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ , मधुर रस युक्त और खट्टे, नमकीन स्वादयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।

कफ प्रकृति के लिए आहार  Diet for Cough Prakriti 

  • दूध का सेवन कफ बढ़ने पर नहीं करना चाहिए। दूध में हल्दी मिलाकर पीने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
  • दूध से बनने वाली चीजे जैसे – मावा , मीठाई, दही, पनीर ,घी, आइसक्रीम का सेवन कफ बढ़ाने में सहायक होता है।
  • चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थ जैसे – माँस, मछली, मक्खन के सेवन से भी कफ बढ़ता है।
  • तिल से बनी चीजे, गन्ना, उड़द की खीचड़ी, सिंघाड़ा, नारियल, कद्दू का सेवन कफ बढ़ाने में सहायक होता है।
  • फ्रिज का ठंडा पानी,ठंडा पेय पदार्थ, बासी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • टमाटर , केला खीरा, शकरकंद, तरबूज के सेवन से बचना चाहिए।
  • हरी सब्जियाँ, दालें, पुरानी शहद का सेवन किया जा सकता है।
  • तुलसी दल, तुलसी की चाय  का सेवन करना लाभदायक होता है।
  • लहसुन,प्याज, मिर्च,गुड़,अदरक, सोंठ, काली मिर्च, लौंग का सेवन फायदेमंद होता है।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि नमकीन, चर्बीयुक्त, चीनी और डेरी प्रोडक्ट्स के सेवन से बचना चाहिए। तीखे, कसैले और गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना कफ कम करने में सहायक होता है।

पित्त प्रकृति के लिए आहार Diet for pitt/bile Prakriti

  • हरी सब्जियां, बीन्स, आलू, शतावरी, अंकुरित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक को छोड़कर अन्य शाक का सेवन किया जा सकता है।
  • गर्म दूध, मीठी लस्सी, पनीर, दही,गन्ना, खजूर, घी, मक्खन का सेवन किया जा सकता है।
  • तेल में नारियल तेल, जैतून का तेल, सूरजमुखी का तेल प्रयोग किया अ सकता है। गर्म तासीर वाले तेल जैसे -सरसों के तेल से बना खाद्य पदार्थ खाने से परहेज करना चाहिए।
  • सभी प्रकार के मीठे फल, ठन्डे पेय एवं मेवे का सेवन किया जा सकता है।
  • इमली, निम्बू, आँवला, संतरा,अनानास आदि खट्टे फलों का सेवन कम करना चाहिए।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों , गर्म मसालेदार भोजन, खमीर वाले खाद्य पदार्थ एवं शराब का सेवन पित्त प्रधान प्रकृति वालों के लिए नुकसानदायक है। इसके विपरीत कसैले, मीठे, कड़वे एवं ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थ का सेवन लाभदायक है।

 

 

डाइट से संबंधित अन्य लेख पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।

 

आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह प्राप्त करने के लिए वेबसाइट लिंक पर क्लिक करिए।

 

 

अन्य लेख पढ़िए :

 

40 की उम्र के बाद महिलाओं के आहार में 5 पोषक तत्व है जरुरी

 

मौसम के अनुसार आहार सेवन के नियम

 

सेहत के लिए हानिकारक 6 विरुद्ध आहार

 

 

 

 

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
6 Harmful Food Combinations one should Avoid सेहत के लिए हानिकारक 6 विरुद्ध आहार Previous post 6 Harmful Food Combinations one should Avoid सेहत के लिए हानिकारक 6 विरुद्ध आहार
How to Maintain Stability of Mind in Meditation ध्यान में चित्त की स्थिरता कैसे बनाए रखें Next post How to Maintain Stability of Mind in Meditation ध्यान में चित्त की स्थिरता कैसे बनाए रखें